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अगला ग्रहण: बुधवार, 12 अगस्त 2026
ग्रहण एक खगोलीय घटना है — सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, और चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। सूर्य ग्रहण पृथ्वी की एक संकरी पट्टी से ही दिखाई देता है, जबकि चंद्र ग्रहण पृथ्वी के पूरे रात्रि वाले भाग से दिखाई देता है।
वैदिक परंपरा में, सूतक काल ग्रहण से पहले का समय है जब पूजा-पाठ और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं — लेकिन यह केवल उन्हीं क्षेत्रों में मान्य होता है जहाँ ग्रहण वास्तव में दिखाई देता है। जो ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देता, उसका सूतक काल भारत में लागू नहीं होता।