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इस समय पंचक चल रहा है
यह पंचक शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को 6:37 am बजे आरंभ हुआ था और मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को 9:53 pm बजे समाप्त होगा।
चोरी व धन-हानि की आशंका; यात्रा, बड़े लेन-देन व उधार से बचें।
सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में। पंचक की अवधि विश्वभर में एक ही होती है — केवल स्थानीय समय भिन्न होता है।
पंचक धनिष्ठा के तृतीय चरण से आरंभ होकर रेवती की समाप्ति पर पूर्ण होता है। नीचे प्रत्येक नक्षत्र की अवधि उसकी लंबाई के अनुपात में दिखाई गई है।
सभी समय IST में। नक्षत्र परिवर्तन का क्षण विश्वभर में एक ही होता है।
पंचक वह अवधि है जब चंद्रमा अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती — में भ्रमण करता है। यह धनिष्ठा के तृतीय चरण से आरंभ होकर रेवती की समाप्ति पर पूर्ण होता है, अर्थात् चंद्रमा का कुंभ और मीन राशि में गोचर। प्रत्येक 27–28 दिन में यह लौट आता है और लगभग पाँच दिन ठहरता है — इसलिए वर्ष में 13–14 बार पंचक पड़ता है। इस दौरान पाँच विशेष कार्य वर्जित माने जाते हैं, इसी से इसका नाम पंचक पड़ा।
धनिष्ठा (स्वामी मंगल), शतभिषा (राहु), पूर्वाभाद्रपद (गुरु), उत्तराभाद्रपद (शनि) और रेवती (बुध)। ध्यान देने योग्य बात यह है कि पंचक धनिष्ठा के आरंभ से नहीं, बल्कि उसके तृतीय चरण से आरंभ होता है — जब चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करता है। इसीलिए पहला नक्षत्र-खंड शेष चार की तुलना में लगभग आधा ही होता है।
पंचक जिस वार से आरंभ होता है, उसी से उसका प्रकार तय होता है — रविवार से रोग पंचक, सोमवार से राज पंचक (शुभ माना जाता है), मंगलवार से अग्नि पंचक, शुक्रवार से चोर पंचक और शनिवार से मृत्यु पंचक, जो सर्वाधिक अशुभ माना गया है। बुधवार या गुरुवार से आरंभ होने वाला पंचक इन पाँच श्रेणियों में नहीं आता; उसे सामान्य पंचक अथवा दोषरहित या निर्दोष पंचक कहा जाता है और अपेक्षाकृत सौम्य माना जाता है।
परंपरा में पाँच कार्य वर्जित माने गए हैं — घर की छत ढलवाना या निर्माण आरंभ करना, दक्षिण दिशा की यात्रा, चारपाई या पलंग बनवाना, ईंधन (लकड़ी, उपले) एकत्र करना, और शव-दाह, जिसके लिए अपरिहार्य स्थिति में विशेष शांति विधान बताया गया है। इनके अतिरिक्त सब कुछ — नित्य पूजा, जप, हवन, दान, विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार, अध्ययन और चिकित्सा — निषिद्ध नहीं है। विशेष रूप से विवाह को पंचक बाधित नहीं करता।
पंचक पूर्णतः चंद्रमा की राशि-स्थिति से निर्धारित होता है, सूर्योदय या स्थानीय क्षितिज से नहीं। इसलिए इसका आरंभ और समाप्ति विश्वभर में एक ही क्षण होती है — राहु काल, चौघड़िया या अभिजित मुहूर्त की भाँति यह नगर-अनुसार नहीं बदलता। केवल घड़ी का स्थानीय समय भिन्न दिखता है। इस पृष्ठ पर सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में दिए गए हैं।