जय संतोषी माता जय संतोषी माता।
अपने सेवक जन की, सुनो विनय माता॥
जय संतोषी माता।
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सोने का सिंहासन, चाँदी का छत्र।
श्वेत पुष्प गले में, धारण का पत्र॥
जय संतोषी माता।
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कुण्डल मकरकृति, सोहत हैं कर्णन।
ललाट विराजित, तिलक अति शोभन॥
जय संतोषी माता।
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व्रत करे जो भक्त, शुक्रवार को आकर।
गुड़ चना प्रसाद, चढ़ाए श्रद्धाकर॥
जय संतोषी माता।
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अम्बिका भवानी, जगत की माता।
दरिद्रता हरे, सुख संपत्ति दाता॥
जय संतोषी माता।
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जो गावे जो ध्यावे, ये आरती रोज।
उसके घर आवे, संतोष और भोज॥
जय संतोषी माता।
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संतोषी माता आरती के बारे में
“संतोषी माता आरती” संतोषी माता की एक प्रिय आरती है, जिसे दीप जलाकर प्रातः एवं संध्या पूजा में गाया जाता है। नीचे इसके पूर्ण 6 पद शुद्ध हिंदी और रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण में दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संतोषी माता आरती के बोल कहाँ पढ़ें?
संतोषी माता आरती के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और आरती के समय गा सकते हैं।
संतोषी माता आरती किस देवता की आरती है?
यह आरती भगवान संतोषी माता को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना के समापन पर गाई जाती है।
संतोषी माता आरती कब और कैसे की जाती है?
आरती प्रातः या संध्या पूजा के अंत में की जाती है — घी या तेल का दीप जलाकर, उसे देवता के सम्मुख घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है।
क्या संतोषी माता आरती रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर संतोषी माता आरती के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।